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EDUCATION AND PSYCHOLOGY: MEANING AND DEFINITION (शिक्षा व मनोविज्ञान : अर्थ व परिभाषा)

“Educational theory and psychology have been and are advancing hand–in–hand.”
                                                        — Ross
‘शिक्षा ’शब्द का स्पष्टीकरण 
(1) शिक्षा का शाब्दिक अर्थ—‘शिक्षा शब्द को तीन अर्थों में प्रयुक्त करते हैं–ज्ञान,  विषय  प्रक्रिया। जैसे –इस व्यक्ति ने बी.  एस–सी. की हुई है, या ज्ञान एक सामान्य स्तर को व्यक्त करता है; इस  व्यक्ति ने एम. एस–सी.‘बोटनी’ की हुई है, जो विषय विशेष को व्यक्त करता  है  और जब हम कहें कि शिक्षा द्वारा व्यक्ति की अंतर्निहित शक्तियों का विकास किया जा रहा है, तो यहां शिक्षा शब्द एक प्रक्रिया को व्यक्त करता है।
शिक्षा शब्द की व्युत्पत्ति ‘शिक्ष’ धातु से हुई है जिसका अर्थ है–सीखना, विद्या प्राप्त करना या ज्ञान ग्रहण करना। ‘विद्या’ शब्द का प्रयोग भी शिक्षा के  ही अर्थ में किया जाता है। विद्या शब्द की व्युत्पत्ति  ‘विद्’ धातु से हुई है।विद्  से ही विद्वान शब्द बना है जिसका अर्थ है–जानने वाला अर्थात ज्ञान की चरम सीमा तक पहुंचाना। विद्या शिक्षा को हम सम्मानित सामान्यता: एक ही अर्थ के लिए प्रयुक्त करते हैं, किंतु इन दोनों के शब्दों में अंतर है।‘विद्या’ से तात्पर्य किसी विशिष्ट ज्ञान में ही पूर्णता या दक्षता प्राप्त करना है, जबकि शिक्षा से तात्पर्य ज्ञान के समग्र रूप से है।
अंग्रेजी भाषा में ‘शिक्षा’ शब्द के लिए ‘एजुकेशन’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।इस शब्द की व्युत्पत्ति लेटिन भाषा के ‘एजूकेटम’ शब्द से हुई है जिसका अर्थ है– शिक्षण कार्य करना।कुछ विद्वानों के अनुसार एजुकेशन शब्द की व्युत्पत्ति ‘इडूसियर’ शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है विकसित करना या पथ प्रदर्शित करना।
 एजुकेशन शब्द के विभिन्न पर्यायवाची शब्दों की व्युत्पत्ति ‘एडूको’ शब्द से मानी गई है जो कि E(ई) और  Duco( डयूको) शब्दों के सयोंग से बना है। यहां ई से तात्पर्य है–आंतरिक तथा ‘डयूको’  से तात्पर्य है–विकसित करना या आगे बढ़ना। इस प्रकार डयूको का पूरा अर्थ हुआ–आंतरिक शक्तियों को विकसित करना अर्थात शिक्षा व  ‘शिक्षा’  वह है  बालक की आन्तरिक शक्तियों को विकसित करती है।

2. शिक्षा का संकुचित अर्थ (औपचारिक शिक्षा)–शिक्षा के संकुचित अर्थ के अनुसार विद्यालय/ महाविद्यालय/ विश्वविद्यालय में प्रदान की जाने वाली शिक्षा ही ‘शिक्षा’ है। इतनी शिक्षा देने वाले (शिक्षक), शिक्षा प्राप्त करने वाला (शिक्षार्थी), शिक्षण सामग्री (पाठ्यक्रम), शिक्षण प्रक्रिया (शिक्षण विधि), मूल्यांकन (परीक्षा –प्रणाली), शिक्षण समय (समय सारणी व वार्षिक  योजनाएं) आदि सभी खुश निश्चित होता है। इसमें सैद्धांतिक शिक्षा प्राप्त की जाती है।इसमें व्यावहारिक या प्रायोगिक  शिक्षा पर इतना अधिक बल नहीं दिया जाता । इस शिक्षा का तात्पर्य  सामान्यतः पुस्तकीय ज्ञान से ही  सम्बद्ध होता है।
  मैकेंजी के अनुसार–“संकुचित अर्थ में शिक्षा से तात्पर्य हमारी शक्तियों के विकास और सुधार के लिये चेतनापूर्वक किए गए प्रयासों से है।”
 ड्रेवर के अनुसार–“औपचारिक शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालकों के ज्ञान, चरित्र व व्यवहारों को एक निश्चित दिशा तथा रूप प्रदान किया जाता है।”
3. शिक्षा का विस्तृत अर्थ (अनौपचारिक शिक्षा)–शिक्षा के विस्तृत अर्थ के अंतर्गत शिक्षा को आजीवन चलने वाली प्रक्रिया माना गया है अर्थात् मानव जन्म से मृत्यु पूर्व तक निरंतर शिक्षा प्राप्त करता रहता है। इसलिए इसमें औपचारिक शिक्षा और अनौपचारिक दोनों प्रकार की शिक्षा आ जाती है, जिससे शिक्षा का संकुचित अर्थ भी व्यापक अर्थ में आ जाता है।इसके अंतर्गत बालक घर –परिवार पड़ोस ,विद्यालय ,समाज व पर्यावरण आदि द्वारा जो सीखता है, अनुभव करता है, प्रेरणा प्राप्त करता है, वे सभी शिक्षा में ही आते हैं। इसमें बालक की सभी ज्ञानेंद्रियां  काम में आती हैं। आता उसका सर्वांगीण विकास संभव हो जाता है।
       रेमांट के अनुसार–“अनौपचारिक शिक्षा विकास का वह क्रम है,जो बाल्यावस्था से परिपक्वता तक चलता है,जिसमें मानव अपने आपको आवश्यकता अनुसार धीरे-धीरे भौतिक सामाजिक और आध्यात्मिक पर्यावरण के अनुकूल बना लेता है।”
 मैकेंजी के  अनुसार –शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है, जो जीवनप्रयत  चलती है और जीवन के प्रत्येक अनुभव उसके ज्ञान भंडार में वृद्धि करते हैं ।”

Comments

Vivek said…
Nice 👍😊👍
Vivek said…
Nice ������

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