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Women's empowerment (महिला सशक्तिकरण)

 
Women empowerment
(महिला सशक्तिकरण)


अर्थ एवं परिभाषा ( meaning and definition ) : सशक्तिकरण शब्द अंग्रेजी के empowerment शब्द का हिन्दी रुपांतरण है। 

                    'Em' एक फ्रांसीसी उपसंग है, जिसका अर्थ हौता है-में  (in)

                      The word Sashktikarn is a Hindi translation of English language empowerment. 'Em' is a French prefix, meaning  'in'

अतःसशक्तिकरण (empowerment) का शाब्दिक अर्थ है शक्ति में हौना अर्थात सशक्त हौना। 

इस प्रकार महिला सशक्तितरण महिलाओं के सक्ष्म होने से है। 

(Therefore, empowerment literally means being in power being empowered. Thus women empowerment  is enabling.)

 महिला सशक्तिकरण से तात्पर्य ऐसी विचारधारा से है जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उन्हे आत्मनिर्णयन का अधिकार प्रदान करने समाज में समता अधारित भागीदारी सुनिश्चित कररने का समर्थन करती है। 

जैसे लोकतंत्र के तीन पिलर है विधायिका, क्रायपालिका, और न्यायपालिका, वैसे ही महिला सशक्तिकरण के तीन पिलर है, आत्मनिर्भर करना।

आत्मनिर्भर का मतलब अब उनकी निर्भता आर्थिक रुप से किसी पर नहीं है या राजनैतिक समाजिक रुप से किसी पर नहीं है। 

आत्मनिर्णयन का मतलब वे अपने स्वयं के निर्णय लेने की ताकत रखने लगी है, इस तरह की आत्मनिर्णयन की ताकत उसमें आ जाये और उसे भागीदारी(Participation) मिले समाज में समाजिक तौर पर राजनैतिक तौर पर सभी प्रकार की निर्णयों में तब हम कहेंगे की महिला सशक्तिकरण है। तो आत्मनिर्भर, आत्मनिर्णयन और भगीदारी ये तीन पिलर है महिला सशक्तिकरण के। 

                                                         आत्मनिर्भता का मतलब उसकी  निर्भरता खुद पर होना है किसी और पर नही, आत्मनिर्णयन का मतलब अपने जिवन कके निर्णयों के लिए किसी और पर निर्भर नहीं हो। और उसके भागीदारी का सुनिश्चित होना हम कहेंगे की महिला सशक्तिकरण का तीन पिलर माना जाना चाहिए। 

Women empowerment refers to an ideology that supports making women self-reliant giving them. the right to self determination, ensuring equity based participation in society.  

        महिला सशक्तिकरण क्यों  आवश्यक   है?(Why is women Empowerments  necessary?) 

 महीलायें समाज की लगभग आधी अबादी का प्रतिनिधित्व करती है। (Women represent about half of the population of the society.)

लैंगिक समता करनने के लिए (To establish gender equality)

महिलाओं का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व लोकतंत्र की मुल भावना के विपरित है (Inadequate representation of women against the basic spirit of democracy.)

समावेसी विकास महिलओं के भागीदारी के बिना असंभव है (Inclusive development is impossible without women participation.)

आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के लिए- राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार यदि भारत में महिलाओं को प्रयाप्त अवसर प्रदान किएऐ जाते है और श्रम बल में उनकी भागीदारी पुरुषो के बराबर हो जाएतो भारत की विकास दर 27 प्रतिशत बढ सकती है। 

भारत में सशक्तीकरण की स्थिति (Stage of women empowerment in India.) 

जनवरी 2020 में प्रकाशिच विशव बैंक की रिर्पोट, वूमेन विजनेश एंड लाॅ, 2020, (Women business and law 2020) के अनुसार आर्थिक तौर पर महिलाओं को सशक्त बनाने के मामले में विशव के 190 देशों में भारत का स्थान 117वाॅं है। 

चिंतनीय स्थिति यह है कि भारत खंडा और लिसोटो देशों से भी पिछे है महिला सशक्तिकरण के मामले मेंं। 

According to the world bank report  published in January 2020, India rank 117 of 190 countries in the world in term of empowering women finically.

worryingly India lays behind countries like Rwanda an Lisoto. 

2019 में संयुक्त राष्ट्र प्रकाशित रिर्पोट Progress of the worlds women 2019-2020 में कहा गया कि आर्थिक वृद्धि होने के बावजुद भारत में महिलाओं की श्रमबल में निरंतर गिरावट आ रही है। श्रम बल में महिलाओं की गिरावट के संबंध में विशव में पहले स्थान पर है, जो कि चिंतनीय विषय है। 

In 2019 the report published by the united nations progress of the world 2019-20 started that despite the  economic growth the labor force of women in India is steadily declining 

requiring the decline of women in the labor force is the first place in the world which is warry. 

भारत की लगभग अबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं का भारत की जीडीपी में योगदान 20 प्रतिशत से भी कम है। 

Women representing nearly half of India's population, contributed less than 20 percent of India's GDP. 

महिला सशक्तिकरण के समक्ष चुनौतियां(Challengers before women empowerment )

पुरुष प्रधान समाज(Male dominated society)

आज भी हमारे देश मेंं महिलाओं की विदेश निति स्वतंत्र नहीं है, क्योंकी आज भी हमारे भारत में पुरुष यह तय करता है कि वह महिला किससे बात करेगी, कितना बात करेगी. कैसी बात करेगी। आज भी किसी महिला को किसी लड़की को ये अजादी नहीं है कि वह कीनसे कीतना बात करना चाहती है। वासतव में Male dominate society में महिलाओं लड़कीयोंं की बस कहने की अजादी होती है। नास्तव में उनको अजादी नहीं होती याहां तक की जब किसी लड़की की शादी होती है तो उसके पिता उसे 10लाख की गाड़ी तो दे देते हैपर उसे Driving नहीं सिखा पाते ताकी वो ससुराल में जाये तो उस गगाड़ी को खुद चला सके, इसके लिइ भी अपने पति पर आसरित होने पड़ते है।

पंचायती राज में भी महिलाओं की यही स्थिती है, कागजी  तौर पर महिलाओं को मुखियां या सरपंच बना कर उन्हे सशक्त बनाने की कोशिश तो की जाती है पर सतह पर सच्चाई कुछ और होती है, मुखीया या सरपंच की सारी शक्तियां वो अपने हाथ में ले लेते है और महिलाएं बस मुर्ति की तरह उस पद के लिए होती है। 

रुढिगत परंपराये जिन्हे धर्म के अधार पर उचीत करार देने का प्रयास किया जाता है(Traditional traditions which are attempted to be justified on the basics of regions)

राजनीतिक असंवेदनशीलता (political insensitivity)

शिक्षा का अभाव(Lack of education )

कार्य स्थल पर महिलाओं का योन शोषण(Sexual abuse of woman at workplace )

ऐसी कई सारी प्रोब्लमस है जिनके कारण महिला पुरी तरह सशक्त नहीं हो पा रही हैं। 

 


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